Rani Durgavati Vishwavidyalaya Recruitment Notice: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि), जबलपुर से जुड़ी तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को निरस्त किए जाने के फैसले को खारिज करते हुए चयनित अभ्यर्थियों के लिए राहत का रास्ता साफ किया है।
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रादुविवि भर्ती मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को राहत
हाई कोर्ट की एकल पीठ ने कहा कि यदि नियुक्ति में कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन मेरिट सूची के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर सकता है। लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच यह फैसला संबंधित अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है रादुविवि भर्ती का पूरा मामला?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रादुविवि की ओर से तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के लिए 27 जून 2014 और 18 सितंबर 2014 को विज्ञापन जारी किए गए थे। भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा आयोजित की गई और इसके बाद परिणाम भी घोषित किया गया।
हालांकि, बाद में 27 अगस्त 2016 को कार्यपरिषद की ओर से पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया। भर्ती रद्द होने के बाद चयन प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का रुख किया और भर्ती निरस्त करने के निर्णय को चुनौती दी।
हाई कोर्ट ने भर्ती मामले में क्या फैसला दिया?
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक खोटे की एकल पीठ ने संबंधित मामले पर आदेश दिया। कोर्ट के अनुसार, यदि चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति में कोई अन्य विधिक बाधा नहीं है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन मेरिट सूची के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी कर सकता है।
इसका मतलब यह है कि केवल भर्ती प्रक्रिया को निरस्त किए जाने के पुराने निर्णय के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता बंद नहीं रहेगा। हालांकि, नियुक्ति की अंतिम कार्रवाई अन्य लागू नियमों और किसी संभावित कानूनी बाधा पर निर्भर करेगी।
किन अभ्यर्थियों को मिली राहत?
इस मामले में शैलेन्द्र कुमार मिश्रा, आनंद परौची, राजकुमार शर्मा, मधुर परोहा और चंद्रशेखर रैदास सहित अन्य अभ्यर्थियों की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया को निरस्त किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद उन अभ्यर्थियों के लिए राहत की स्थिति बनी है, जो संबंधित भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे और मेरिट सूची में चयनित हुए थे। आगे की नियुक्ति प्रक्रिया विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोर्ट के आदेश और लागू नियमों के अनुसार की जानी होगी।
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों से जुड़ा मामला भी सामने आया
इसी सुनवाई के दौरान दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवा को नियमित किए जाने से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न को भी लार्जर बेंच के समक्ष भेजे जाने का उल्लेख है।
मुख्य सवाल यह है कि नियमित पद पर संविलियन से पहले दैनिक वेतन भोगी के रूप में की गई सेवा को पेंशन लाभ के लिए अर्हक सेवा माना जा सकता है या नहीं। यह मुद्दा नरसिंहपुर के लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण सिंह गौड़ की याचिका से संबंधित बताया गया है।
कल्याण सिंह गौड़ का मामला क्या है?
याचिका में बताया गया कि कल्याण सिंह गौड़ की नियुक्ति 1 जुलाई 1985 को चौकीदार के पद पर दैनिक वेतन भोगी के रूप में हुई थी। इसके बाद 13 फरवरी 1997 को उनका नियमित पद पर संविलियन किया गया। वे 31 जनवरी 2018 को सेवानिवृत्त हुए।
उनकी याचिका में नियमित होने से पहले की सेवा को पेंशन लाभ के लिए अर्हक सेवा में शामिल किए जाने से संबंधित कानूनी सवाल उठाया गया था। इस मुद्दे को लार्जर बेंच के समक्ष भेजे जाने की बात सामने आई है।
अभ्यर्थियों के लिए फैसले का क्या मतलब है?
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि रादुविवि की संबंधित तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी भर्ती को निरस्त किए जाने के पुराने निर्णय के बाद चयनित अभ्यर्थियों को न्यायालय से राहत मिली है। यदि नियुक्ति के संबंध में कोई अन्य कानूनी या प्रशासनिक बाधा नहीं है, तो मेरिट सूची के आधार पर आगे नियुक्ति की कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, अभ्यर्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि हाई कोर्ट के आदेश का मतलब यह नहीं है कि सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से हो गई हैं। नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नियमों और कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पूरी की जाएगी।
रादुविवि भर्ती मामले की महत्वपूर्ण जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| संबंधित संस्था | रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर |
| भर्ती | तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती |
| हाई कोर्ट | मध्य प्रदेश हाई कोर्ट, जबलपुर |
| भर्ती विज्ञापन | 27 जून 2014 एवं 18 सितंबर 2014 |
| भर्ती निरस्त करने का निर्णय | 27 अगस्त 2016 |
| मुख्य राहत | अन्य विधिक बाधा न होने पर मेरिट सूची के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकता है |
| याचिकाकर्ताओं में शामिल | शैलेन्द्र कुमार मिश्रा सहित अन्य अभ्यर्थी |
अब आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब संबंधित अभ्यर्थियों की नजर रादुविवि प्रशासन की अगली कार्रवाई पर रहेगी। विश्वविद्यालय को कोर्ट के आदेश और लागू नियमों के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगा। अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र या आगे की प्रक्रिया से संबंधित आधिकारिक सूचना के लिए विश्वविद्यालय के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
रादुविवि की तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़े मामले में हाई कोर्ट का फैसला चयनित अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण राहत है। कोर्ट ने भर्ती निरस्त किए जाने के निर्णय को खारिज करते हुए अन्य कानूनी बाधा नहीं होने की स्थिति में मेरिट सूची के आधार पर नियुक्ति पत्र जारी करने का रास्ता खुला रखा है। अब आगे की कार्रवाई रादुविवि प्रशासन द्वारा कोर्ट के निर्देशों और संबंधित नियमों के अनुसार की जाएगी।
नोट: इस खबर में दी गई जानकारी उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। नियुक्ति से संबंधित अंतिम स्थिति के लिए अभ्यर्थियों को संबंधित विश्वविद्यालय एवं न्यायालय के आधिकारिक आदेश/सूचना को प्राथमिकता देनी चाहिए।