MP में 7500 नवनियुक्त प्राथमिक शिक्षकों को बड़ी राहत: अब आपसी सहमति से बदल सकेंगे स्कूल और जिला | MP Teacher Latest Update 2026

MP Teachers Promotion 2026

MP 7500 Primary Teachers Transfer Update

MP Teacher Latest Update 2026: The Madhya Pradesh government has provided an opportunity for 7,500 recently appointed primary teachers to change their places of posting. According to new guidelines issued by the School Education Department, teachers who wish to swap their postings by mutual consent can change their schools and districts.

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मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में नियुक्त हुए 7500 प्राथमिक शिक्षकों को अपने पदस्थापन (पोस्टिंग) के स्थान में बदलाव करने का एक अवसर प्रदान किया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, जो शिक्षक एक-दूसरे की जगह आपसी सहमति (Mutual) से स्थानांतरण कराना चाहते हैं, वे अपना स्कूल और जिला बदल सकते हैं।

इस प्रक्रिया का लाभ उठाने के लिए शिक्षा विभाग ने कुछ मुख्य शर्तें लागू की हैं:

  • समान श्रेणी में ही तबादला: म्यूचुअल ट्रांसफर केवल समान वर्ग (सामान्य से सामान्य, एससी से एससी और एसटी से एसटी) के शिक्षकों के बीच ही संभव होगा।
  • आवेदन की तिथियां: इसके लिए इच्छुक शिक्षकों को 10 और 11 अगस्त को विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन जमा करना होगा।
  • सहमति पत्र अनिवार्य: दोनों शिक्षकों को अपना सहमति पत्र (Consent Letter) पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
  • स्कूलों की अदला-बदली: जिला बदलने के साथ-साथ दोनों शिक्षकों को एक-दूसरे के मूल स्कूल में ही पदस्थापित किया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई शिक्षक गांव से शहर के स्कूल में आ रहा है, तो दूसरे शिक्षक को उसी गांव के स्कूल में जाना होगा।
  • भौतिक सत्यापन: 13 अगस्त को दोनों शिक्षकों को एक संयुक्त शपथ-पत्र के साथ संचनालय में उपस्थित होकर सत्यापन कराना होगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?
लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह के अनुसार, दूरदराज के जिलों में पदस्थ नए शिक्षकों ने पारिवारिक, सामाजिक और चिकित्सा से जुड़ी कठिनाइयों का हवाला देते हुए बड़ी संख्या में आवेदन दिए थे। शिक्षकों की इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह “परस्पर जिला परिवर्तन सुविधा” शुरू करने का निर्णय लिया है।

पदोन्नति के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार
दूसरी ओर, वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त लगभग 75 हजार शिक्षकों की पदोन्नति (Promotion) का रास्ता साफ करने के लिए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने एक पूरक याचिका दायर कर मांग की है कि 2005 और 2008 में आयोजित संविदा शाला शिक्षक श्रेणी-2 पात्रता परीक्षा को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के समकक्ष माना जाए। सरकार का तर्क है कि प्रदेश में 2005 से ही पात्रता परीक्षा के आधार पर भर्तियां हो रही हैं, जबकि पूरे देश में टीईटी की व्यवस्था अप्रैल 2010 से लागू की गई थी।


MP Teachers Promotion 2026

MP Teacher Latest Update 2026: मध्य प्रदेश में शिक्षकों की पदोन्नति (प्रमोशन) को लेकर फैले भ्रम के निवारण से संबंधित एक नया समाचार है। लोक शिक्षण के संयुक्त संचालक द्वारा टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण शिक्षकों की सूची मांगे जाने के बाद यह गलतफहमी पैदा हो गई थी कि केवल उन्हीं शिक्षकों का प्रमोशन होगा जो टीईटी पास हैं। हालांकि, विभाग ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी करते हुए साफ किया है कि टीईटी हो या न हो, इससे सामान्य प्रमोशन प्रक्रिया पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और यह केवल एक सामान्य जानकारी एकत्र करने के लिए था। इसके साथ ही, जिले के अंतर्गत कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सहायक ग्रेड-तीन के पदों पर पदोन्नति के लिए भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए है.  अधिक जानकारी के लिए निचे पढ़े

मध्यप्रदेश के शिक्षकों के बीच पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि जिन शिक्षकों ने डीएड (D.Ed.) पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, उनके प्रमोशन पर रोक लग सकती है। इस खबर के बाद प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बन गई थी। अब लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) की ओर से जारी स्पष्टीकरण ने इस भ्रम को पूरी तरह दूर कर दिया है।

क्या था पूरा मामला?

हाल ही में विभागीय स्तर पर एक पत्र जारी होने के बाद यह चर्चा शुरू हुई कि सभी पदोन्नतियां विभागीय परीक्षा के बाद ही होंगी और डीएड परीक्षा में सफल होना भी अनिवार्य होगा। इस खबर के बाद कई शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध जताया और स्पष्ट जानकारी की मांग की। बाद में विभाग ने स्पष्ट किया कि संबंधित पत्र केवल जानकारी एकत्र करने के उद्देश्य से जारी किया गया था। इसका उद्देश्य डीएड उत्तीर्ण एवं अनुत्तीर्ण शिक्षकों का विवरण प्राप्त करना था, न कि पदोन्नति रोकना।

मुख्य बातें (Highlights)

— डीएड परीक्षा को लेकर फैली अफवाहों पर विभाग ने दिया स्पष्टीकरण।
— डीएड उत्तीर्ण या अनुत्तीर्ण होने से प्रमोशन प्रभावित नहीं होगा।
— संबंधित पत्र केवल जानकारी एकत्र करने के उद्देश्य से जारी किया गया था।
— शिक्षकों के बीच फैले भ्रम को विभाग ने आधिकारिक रूप से दूर किया।
— चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए भी अलग दिशा-निर्देश जारी किए गए।

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प्रमोशन पर विभाग का क्या कहना है?

लोक शिक्षण संचालनालय ने साफ किया है कि डीएड परीक्षा की स्थिति के आधार पर किसी भी शिक्षक की पदोन्नति नहीं रोकी जाएगी। प्रमोशन की प्रक्रिया पूर्व निर्धारित नियमों और लागू सेवा शर्तों के अनुसार ही संचालित होगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में चल रही कई खबरें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं थीं, जिसके कारण शिक्षकों में भ्रम की स्थिति बनी।

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए भी जारी हुए निर्देश

इसी बीच विभाग ने स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति प्रक्रिया नियमानुसार की जाएगी तथा आवश्यक सेवा अभिलेखों एवं वरिष्ठता सूची के आधार पर पात्र कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।

शिक्षकों के लिए राहत की खबर

इस स्पष्टीकरण के बाद उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है जो डीएड परीक्षा को लेकर अपने प्रमोशन को लेकर चिंतित थे। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल डीएड परीक्षा के आधार पर किसी शिक्षक की पदोन्नति प्रभावित नहीं होगी।

नोट: यह लेख उपलब्ध समाचार में प्रकाशित जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। यदि विभाग द्वारा भविष्य में कोई नया आदेश जारी किया जाता है, तो वही अंतिम रूप से मान्य होगा।

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