Madhya Pradesh Medical College Bharti: प्रदेश में सरकार लगातार नए मेडिकल कॉलेज खोल रही है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा छात्रों को डॉक्टर बनने का मौका मिल सके। लेकिन अब इन कॉलेजों में एक बड़ी समस्या सामने आई है — पढ़ाने वाले शिक्षकों (फैकल्टी) की भारी कमी।
🏥 6 नए कॉलेज ‘उधार की फैकल्टी’ से शुरू
पिछले एक साल में सरकार ने सतना, सिवनी, नीमच, मंदसौर, सिंगरौली और श्योपुर में 6 नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए हैं।
शुरुआत में इन कॉलेजों को अस्थायी तौर पर दूसरे कॉलेजों से उधार ली गई फैकल्टी के ज़रिए चलाया गया ताकि कॉलेजों को मान्यता मिल सके।
लेकिन अब, जब छात्र नियमित पढ़ाई कर रहे हैं, तो शिक्षकों की कमी के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अब इन कॉलेजों में स्थायी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की है।
इस बार प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के सभी पदों को भरा जाएगा।

| पद का नाम | कुल पद | चयन प्रक्रिया | आवेदन की अंतिम तिथि |
|---|---|---|---|
| प्रोफेसर | 84 | साक्षात्कार के आधार पर | 7 नवंबर |
| एसोसिएट प्रोफेसर | 182 | साक्षात्कार के आधार पर | 7 नवंबर |
| असिस्टेंट प्रोफेसर | 200 | साक्षात्कार के आधार पर | 7 नवंबर |
कॉलेजों में डिमॉन्स्ट्रेटर के सभी पद खाली
नए कॉलेजों की ऐसी स्थिति हो गई है कि इनके कई विभागों में एचओडी तक नहीं हैं। इसलिए जनरल मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, डर्मेटोलोजी, मानसिक रोग, गायनिक और रेडियो डायग्नोसिस विषयों के लिए 6-6 प्रोफेसरों की भर्ती की जा रही है। यही नहीं इन कॉलेजों के लिए 32-32 डिमॉन्स्ट्रेटर के पद स्वीकृत हैं लेकिन यह सभी खाली हैं।
शहडोल
प्राध्यापक के स्वीकृत 24 पद में 8 कार्यरत, सह प्राध्यापक के 31 में 16 व असिस्टेंट के 47 में 20 भरे।
शिवपुरी
प्राध्यापक के 24 में 10, सह प्राध्यापक के 30 में 21, असिस्टेंट प्रोफेसर के 47 में से 25 ही भरे।
खंडवा
प्रोफेसर के 19 में 13, सह प्राध्यापक के 30 में 19, असिस्टेंट के 44 में से 12 पद ही भरे।
सतना
प्रोफेसर के 22 में 6, सह प्राध्यापक के 46 में 16, असिस्टेंट के 76 में से 51 पद ही भरे।
सागर
प्रोफेसर के 33 में 25, सह प्राध्यापक के 62 में 30, असिस्टेंट के 110 में से 43 पद ही भरे।
भोपाल
प्रोफेसर के 56 में 44, सह प्राध्यापक के 97 में 87, असिस्टेंट के 161 में से 126 पद ही भरे।
इंदौर
प्रोफेसर के 50 में 42, सह प्राध्यापक के 100 में 82, असिस्टेंट के 163 में 134 पद भरे।
मौजूदा कॉलेजों में ही संसाधन बढ़ाकर बढ़ाई जा सकती हैं सीटें
प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन मध्यप्रदेश के अध्यक्ष डॉ राकेश मालवीय के अनुसार प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने का सरकार का फैसला ही गलत है। क्योंकि बिना टीचर्स के मेडिकल एजुकेशन की गुणवत्ता और बिगड़ेगी। होना यह चाहिए कि मौजूदा मेडिकल कॉलेजों में ही सीटें बढ़ाई जाएं और वहां पर्याप्त मेडिकल टीचर्स और अन्य स्टाफ की नियुक्ति की जाए। मेडिकल टीचर्स इसलिए नहीं मिल रहे हैं क्योंकि प्रदेश में सेवा शर्तें और सुविधाएं उपयुक्त नहीं हैं। अस्पतालों में भी सुविधाएं नहीं हैं। दूरस्थ क्षेत्रों के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षकों को विशेष पैकेज से आकर्षित करने का प्रयास करना चाहिए।
उधार के प्रोफेसरों से दिलाई मान्यता
श्योपुर और सिंगरौली के मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने के लिए विभाग ने ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज से 4, जीएमसी भोपाल से 3, रीवा से 2 और सागर एवं इंदौर के मेडिकल कॉलेजों से एक-एक प्रोफेसर का ट्रांसफर किया गया था। इसका जमकर विरोध हुआ लेकिन विभाग नहीं माना। इनमें से कुछ लोग कोर्ट भी चले गए। आखिरकार सरकार ने अगस्त 2024 में केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा के हाथों इन दोनों कॉलेजों का लोकार्पण करा दिया और इनमें सौ-सौ सीटों पर प्रवेश की अनुमति भी मिल गई।
