MP State Pharmacy Council Online Registration:
मप्र फार्मेसी काउंसिल में पंजीयन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का दावा तो किया गया, लेकिन हकीकत यह है कि रोजाना सौ से अधिक छात्र कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। सितंबर में शुरू हुए नए ऑनलाइन सिस्टम के बावजूद अब भी करीब 7 हजार आवेदन अटके हुए हैं। इनमें से लगभग 5 हजार आवेदन तकनीकी कारणों से रुके हैं, जबकि 2 हजार आवेदन निजी विश्वविद्यालयों द्वारा छात्रों की सूची न भेजने के कारण लंबित हैं।
अधिकारियों के अनुसार निजी विश्वविद्यालयों ने छात्रों का डेटा डिजिलॉकर पर अपलोड नहीं किया, न ही वार्षिक पासआउट सूची काउंसिल को भेजी। इससे ऑटो वेरिफिकेशन ठप है। वहीं सरकारी कॉलेजों के लगभग चार हजार आवेदनों का निराकरण हो चुका है।
काउंसिल अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि गलत या अधूरी जानकारी वाले आवेदनों में सुधार कराया जा रहा है। निजी विश्वविद्यालयों को छात्रों की सूची शीघ्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं। चेतावनी दी गई है कि देरी करने वाले संस्थानों की मान्यता और संबद्धता रद्द की जा सकती है।
सूची नहीं मिलने से अटका वेरिफिकेशननए सॉफ्टवेयर में पंजीयन के दौरान छात्रों को समग्र आइडी, डिजि-लॉकर, निवास व विवाह प्रमाणपत्र और एफडीए से संबंधित जानकारी अपलोड करनी होती है। सिस्टम आधारित ऑटो वेरिफिकेशन की व्यवस्था होने के बावजूद छात्रों को दस्तावेज सत्यापन के लिए कार्यालय बुलाया जा रहा है। कई आवेदन अधूरी जानकारी या गलत डेटा के कारण भी लंबित हैं।
